सत्यमेव जयते नानृतम् सत्येन पन्था विततो देवयानः । येनाक्रमन्त्यृषयो ह्यात्मकामो यत्र तत् सत्यस्य परमं निधानं ॥ ( मुण्डक-उपनिषद 3.1.6)

सत्य की ही विजय होती है, असत्य की नहीं। सत्य से ही वह (देवयान) मार्ग परिपूर्ण है, जिसके द्वारा कामना रहित ऋषिगण, जहां सत्य का श्रेष्ठ भण्डार (परम आनंद) है, उस (परमपद) को प्राप्त करते हैं।

Truth alone triumphs; not falsehood. Through truth the divine path is spread out by which the sages whose desires have been completely fulfilled, reach to where is that supreme treasure of Truth.

बुधवार, 7 नवंबर 2012

माँ गंगाजी की धारा में हमें दर्शन होता है .... सत्य सनातन धर्म का ||

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image courtesy : https://www.facebook.com/GreatIndianculture(Gangotri)
माँ गंगाजी की धारा में हमें दर्शन होता है : 
अनंत की सर्वव्यापकता के स्वीकार का .. 
समुद्र में लीन होकर, धारा के समुद्र बन जाने की घटना का .. 
समान गंतव्य तक जाने वाली धाराओं को अपने में समाहित कर लेने की क्षमता का .. 
असीमता में मिल जाने के सफल प्रयास की लोकहितकारी सार्थकता का .. 
एवं उसे आदर देने वाले कृतज्ञ समाज का। 
माँ गंगाजी की धारा में हमें दर्शन होता है : 
सत्य पर अवलंबित संस्कृति की अविरल बहती शीतलता का .. 
कर्त्तव्य पूर्ति के भगीरथी संकल्प की सिद्धि का .. 
निरंतर प्रवाह की पवित्र महिमा का .. 
मलिनता के त्याग का .. निर्मलता से उपलब्ध परम शान्ति का .. 
श्रद्धा के शिखर का .. विश्वास की गहराईयों का .. आस्था के महाकुम्भ का .. 
कथन का सार यही है कि ...
माँ गंगाजी की धारा में हमें दर्शन होता है - सत्य सनातन धर्म का ... 
-- (लोकेश शुक्ल), सनातन धर्म प्रचार समिति, बुरहानपुर
(https://www.facebook.com/ssdpsamiti )