सत्यमेव जयते नानृतम् सत्येन पन्था विततो देवयानः । येनाक्रमन्त्यृषयो ह्यात्मकामो यत्र तत् सत्यस्य परमं निधानं ॥ ( मुण्डक-उपनिषद 3.1.6)

सत्य की ही विजय होती है, असत्य की नहीं। सत्य से ही वह (देवयान) मार्ग परिपूर्ण है, जिसके द्वारा कामना रहित ऋषिगण, जहां सत्य का श्रेष्ठ भण्डार (परम आनंद) है, उस (परमपद) को प्राप्त करते हैं।

Truth alone triumphs; not falsehood. Through truth the divine path is spread out by which the sages whose desires have been completely fulfilled, reach to where is that supreme treasure of Truth.

सोमवार, 25 जून 2012

The God Says ....


The God Says ....  
यो मां पश्यति सर्वत्र
                    सर्वं च मयि पश्यति ।
तस्याहं न प्रणश्यामि
                    स च मे न प्रणश्यति ॥
          "For one who sees Me everywhere and sees everything in Me, I am never lost, nor is he ever lost to Me." 
Shreemad Bhagwat Geeta 06.30
— with Punit Poddar and 27 others.

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